9 अप्रैल 2019 - 13:43
रूस ने एस्टोनिया पर हमला कर दिया, नाटो की सेनाएं उसका रास्ता रोकने के लिए आगे बढ़ रही हैं, जर्मन टीवी का अजीब मज़ाक़

जर्मनी के एक टीवी चैनल ने अपने एक विश्लेषणात्मक कार्यक्रम में दर्शकों को यह बताकर हैरत में डाल दिया कि रूसी सेनाओं ने बाल्टिक देशों पर चढ़ाई कर दी।

क्या यह "कल्पना" थी या नाटो समर्थकों का रूस के ख़िलाफ़ एक प्रचारिक हथकंडा था?

नेश्नल टीवी चैनल ज़ैडडीएफ़ पर कार्यक्रम हियूट जर्नल के एंकर क्लॉज़ क्लैबर ने चेहरे पर चिंता का भाव लाते हुए घोषणा की, यूरोपीय एवं जर्मन घटकों के साथ अमरीका की सेनाएं ज़मीन, वायु और समुद्र के मार्गों से एस्टोनिया की ओर आगे बढ़ रही हैं, जिसपर एक बार फिर हमला किया गया है, जिस तरह से इससे पहले क्रीमिया पर किया गया था।

इस घोषणा ने करोड़ों दर्शकों को गहरी चिंता में डाल दिया, लेकिन तुरंत ही एंकर ने एलान दर्शकों से पूछा, घबरा गए क्या?

क्लैबर ने कहा, घबराओ नहीं, यह सच नहीं है। यह एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन वास्तविकता के काफ़ी निकट।

जर्मनी में पत्रकारिता के मैदान में एक बड़ा नाम समझे जाने वाले क्लैबर ने आगे कहा, इस झूठे सिनारियो को यह स्पष्ट करने के लिए तैयार किया गया था, ताकि आप समझ जाएं कि निकट भविष्य में ऐसी स्थिति पेश आ सकती है कि जब युद्ध को टाला नहीं जा सके, यह एक चौंकाने वाली ख़बर हो सकती है और जर्मनी एस्टोनिया जैसे अपने घटकों की रक्षा के लिए तैयार है।

हालांकि इस तरह के स्टंट से एक बड़ा संकट भी उत्पन्न हो सकता है। यहां यह सोचने की ज़रूरत है कि लोग अगर इसे सच मान लें तो इसके क्या परिणाम निकलेंगे?

ज़रा सोचिए कि अगर पश्चिमी मीडिया की इस तरह की किसी सूचना के बाद अगर रूसी टीवी चैनल इस फ़ेक न्यूज़ को चला दे और घोषणा करे कि नाटो ने कैलिननग्राद पर हमला कर दिया है। क्या इस तरह की पत्रकारिता एक ग़ैर ज़िम्मेदाराना पत्रकारिता नहीं है?

सबसे बड़ी मूर्खता तो लोगों को यह बताना है कि रूस के साथ भविष्य में युद्ध होने वाला है, इसलिए आपको नाटो को पसंद करना चाहिए और उसका समर्थन जारी रखना चाहिए।